यह कार्यक्रम अपनी तरह का नया कार्यक्रम है, जहां यह एक पारम्परिक मुशायरा न होकर एक ग़ज़लकार और उसकी ग़ज़लों को सलाम है। इस कार्यक्रम में एक वरिष्ठ शायर होते हैं, और दो या तीन अन्य शायर शिरक़त करते हैं। इसमें वरिष्ठ शायर की शायरी के साथ-साथ उनकी ज़िन्दगी पर भी बातें होती हैं। |